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Saturday, 28 January 2017

Rani Padmavati Johar

25 अगस्त 1303 ई० की भयावह
काली रात थी ...
स्थान मेवाड़ दुर्ग राजस्थान ....
राजा रतन सिंह जी की रियासत ...
राजा रतन सिंह की धर्मपत्नी रानी पद्मावती सहित 200 से ज्याद राजपूत स्त्रियाँ उस दहकते हवन कुंड के सामने खड़ी थी ....


दुर्दांत आक्रान्ता अल्लौद्दीनखिलजी दुर्ग के बंद द्वार पर अपने सेना के साथ खड़ा था .....
अलाउद्दीन वही शख्स था जो परम रूपवती रानी पद्मावती को पाना चाहता था और अपने हरम की रानी बना कर रखना चाहता था ....
रानी पद्मावती को प्राप्त करने के लिए उसने दो बार मेवाड़ पर हमला किया ...लेकिन वीर राजपूतों के आगे उसकी सेना टिक ना सकी ...लेकिन इस बार मामला उलट चूका था

अलाउद्दीन लम्बी चौड़ी सेना के साथ मेवाड़ के दुर्ग के बाहर अपना डेरा दाल चूका था....ज्यादा तर राजपूत सेना वीरगति को प्राप्त हो चुकी थी......सबको समझ में आ चूका था की अब इन हरामियों से बचना मुस्किल हैं ..मुस्लमान ना सिर्फ युद्ध में हिन्दू राजाओं को मरते थे बल्कि उनकी औरतों को साथ बलात्कार भी करते और अंत